Aam Aadmi Party का बारे में अगर थोडा जाने तो आप पाएंगे कि भारतीय राजनीति में कुछ लोगो ने कुछ अच्छा करने का बीड़ा उठाया और उस सपने को एक तरह से क्रांतिकारी तौर पर सच कर दिखाया है और लोगो में इस से यह मेसेज जाता है कि अगर कुछ लोग समाज और देश की बेहतरी के लिए काम करना चाहें तो इतना भी मुश्किल नहीं है जितना लगता है | अब Aam Aadmi Party कितना कुछ अच्छा कर पाती है या जनता की उम्मीदों पर कितना खरा उतर पाती है यह तो वक्त ही बतायेंगा क्योंकि किसी भी घटना के consequences बहुत से कारकों पर निर्भर करते है और आम आदमी पार्टी की सफलता या असफलता के लिए बहुत से सामाजिक और राजनीतिक कारण है जो इसके भविष्य का निर्धारण करेंगे | तो चलिए इसी बारे में कुछ और जानकारी प्राप्त करते है –

Aam Aadmi Party modern history in hindi

Aam Aadmi Party की अभी दिल्ली में सरकार है और इसके अस्तित्व में आने की बात करें तो जब दो सामाजिक कार्यकर्त्ता अन्ना हजारे और अरविन्द केजरीवाल के बीच कुछ मतभेद हो गये थे तो आम आदमी पार्टी की स्थापना हुई | असल में India Against Corruption मूवमेंट जब चल रहा था तो अन्ना हजारे और अरविन्द केजरीवाल के बीच में मतभेद हो गये थे | अन्ना इस मामले में राजनीति के खिलाफ थे जबकि Arvind Kejriwal को लगता था कि अगर सिस्टम को बदलना है तो सिस्टम के अंदर घुसे बिना इसे नहीं बदला जा सकता है | इसलिए अन्ना जी अलग होकर 26 nov 2012 आम आदमी पार्टी का गठन हुआ और साल 2013 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में पार्टी ने पहली बार चुनाव भी लड़ा जिसमे पार्टी दूसरी सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर सीटें लेकर आई|
उस साल Aam Aadmi Party को 70 में से 28 सीटें मिली | हालाँकि किसी भी पार्टी के पास बहुतमत नहीं होने की वजह से Aam Aadmi Party ने कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनाई जिसका मकसद यह था कि जल्दी से जल्दी दिल्ली विधानसभा में Lokpal bill पास किया जाये लेकिन जल्दी ही यह साफ़ हो गया कि दूसरी पार्टी इसे सपोर्ट नहीं करेगी जिसकी वजह से AAP government ने रिजाइन कर दिया | उस चुनाव के बाद बनी सरकार की बात करें तो आम आदमी पार्टी की सरकार महज 49 दिन सत्ता में रही थी | 2015 में फिर से दिल्ली में विधानसभा के चुनाव हुए जिसमे आम आदमी पार्टी ने 67 सीट 70 में से जीती और बीजेपी को महज तीन सीटें मिली | कांग्रेस को दिल्ली चुनाव में एक भी सीट नहीं मिली जिसकी वजह से आम आदमी पार्टी की दोबारा से दिल्ली में स्पष्ट बहुमत वाली सरकार बनी |
Aam Aadmi Party history in hindi
Aam Aadmi Party history in hindi

तो जैसा कि आप अब तक जानते है कि AAP का जन्म उसी आन्दोलन से हुआ जो भ्रष्टाचार के खिलाफ चलाया जा रहा था और इसे हम India Against Corruption movement के नाम से भी जानते है | उस समय अरविन्द केजरीवाल और दूसरे कई सोशल एक्टिविस्ट टीम अन्ना में शामिल थे और 2011 और 2012 में इस आन्दोलन एक बड़ा रूप ले लिया और देश भर से लोग इस मूवमेंट से जुड़ने लगे | हजारे हमेशा से अपने मूवमेंट को राजनीति से अलग रखना चाहते थे लेकिन केजरीवाल और कुछ दूसरे एक्टिविस्ट यह मानते थे कि चूँकि सभी राजनीतिक दलों से बात करने के बाद भी movement के लिए कोई हल नहीं दिख रहा है और कोई भी भी पार्टी जन लोकपाल बिल के लिए सीरियस नहीं है इसलिए क्यों नहीं एक राजनीतिक पार्टी बनाकर चुनाव लड़ा जाये ताकि डायरेक्ट पॉवर में आने के बाद वो लोग खुद ही जन लोकपाल बिल के लिए कुछ कर पायें | इसके लिए फेसबुक पर एक पोल कंडक्ट करके लोगो से इस बारे में राय ली गयी | पोल के नतीजे राजनीतिक रणनीति के पक्ष में थे लेकिन अन्ना ने इसे ख़ारिज कर दिया |  अन्ना हजारे का ये मानना था कि चूँकि चुनाव में बहुत से पैसे खर्च होते है इसलिए इतना फण्ड जुटाना मुमकिन नहीं होगा और दूसरा इस बात की भी कोई गारंटी नहीं है कि चुनाव जीतने के बाद कोई नेता ईमानदार रहेगा और यह भी संभव है कि फण्ड जुटाने के लिए समाजसेवियों को अपने नैतिक मूल्यों से समझौता करना पड़े |
19 September 2012 को अन्ना और अरविन्द केजरीवाल ने यह पाया कि उनकी राय इस मुद्दे पर आपस में नहीं मिलेगी और चूँकि केजरीवाल को कुछ दूसरे सोशल एक्टिविस्ट जैसे कि प्रशांत भूषण और शांति भूषण का समर्थन था और राजनीतिक दल बनाने की अरविन्द की राय से सहमत थे इसलिए 2 October को अरविन्द केजरीवाल ने Aam Aadmi Party बनाने की घोषणा कर दी और 26 नवम्बर को पार्टी लांच हो गयी |
इसके बाद पार्टी में बहुत से उतार चढ़ाव आये जिनके बारे में हम अगली कुछ पोस्ट्स में बात करेंगे तो ये है Aam Aadmi Party modern history in hindi और अधिक जानकारी के लिए आप हमे ईमेल कर सकते है और हमसे regular updates पाने के लिए आप हमे फेसबुक पर follow कर सकते है या ईमेल सब्सक्रिप्शन ले सकते है | 

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