Wifi शब्द एकदम हमारी दैनिक जिन्दगी का जरुरी शब्द बन गया है क्योंकि अब हम लोग Internet के बिना एक पल भी नहीं रह पाते है और यह कमाल का परिवर्तन है जो हमारी जिन्दगी में आया है जिसने पूरी दुनिया को जैसे एक धागे में पिरो दिया है और जानकारी अब हमसे एकदम करीब है फिर चाहे वो Health updates हो या सामान्य ज्ञान या किसी तरह का कोई मनोरंजक विडियो या फिर सब दोस्तों से जुड़े रहने के लिए सोशल साइट्स का इस्तेमाल | इसी इन्टरनेट से जुड़ने के लिए कभी हम मोबाइल डाटा इस्तेमाल करते है तो कभी Wifi और कभी कभी तो दोस्तों से हॉटस्पॉट भी उधार मांगते है लेकिन क्या आप जानते है Wifi का जनक कौन है और ये तकनीक हमारी आम जिन्दगी में कैसे आई ? अगर नहीं तो चलिए जानते है WIFI history हिंदी में –

WIFI modern history in hindi (वाई फाई का इतिहास)

Wifi के बारे में अगर कहें तो बेसिकली यह एक तकनीक है जिसके जरिये इन्टरनेट कनेक्टिविटी को आसान कर दिया जाता है इसमें होता ये है कि कोई भी wifi router जो होता है वह इन्टरनेट कनेक्टिविटी को Radio Waves में बदल देता है और फिर वो सारी devices जो Wifi enabled होती है वो यह सिग्नल ग्रहण कर इन्टरनेट से जुड़ जाती है | इस तरह बिना तार के इस्तेमाल के हम इन्टरनेट इस्तेमाल कर सकते है | यह उदाहरण ठीक से समझने के लिए आप JIO FI को समझ सकते है जिसमे इस डालकर हम किसी भी wifi सुविधा से लेस डिवाइस या मोबाइल और लैपटॉप को इन्टरनेट से जोड़ सकते है |
WIFI history/वाई फाई का इतिहास – सन 1997 में सबसे पहले wifi तकनीक को लोगो के इस्तेमाल के लिए कमर्शियल तौर पर रिलीज़ किया गया था |  हालाँकि इस तकनीक का आविष्कार बहुत पहले ही कर लिया गया था और इसका क्रेडिट बहुत से लोगो को जाता है जिन्होंने समय के साथ इसे बेहतर करने में अपना योगदान दिया है | 1971 से लेकर 1991 तक wifi तकनीक को विकसित करने के लिए बहुत से लोगो ने और कम्पनीज ने इस तकनीक पर काम किया है जिसमे ऑस्ट्रेलिया के रेडियो खगोल विज्ञानी John O’Sullivan के साथ साथ उनके साथ काम करने वाले John Deane का नाम प्रमुखता से लिया जाता है क्योंकि इन्ही लोगो ने Wi-Fi तकनीक को विकसित करने में उल्लेखनीय मेहनत की थी |
WIFI modern history in hindi
WIFI modern history in hindi

आपको यह जानकर हैरानी होगी कि Wi-Fi को इसके शुरूआती दिनों में इसी नाम से नहीं जाना जाता था बल्कि इसका नाम August 1999 के बाद ये पड़ा | इस से पहले इसे ‘IEEE 802.11b Direct Sequence.’  के नाम से जाना जाता था इसलिए  Wi-Fi Alliance ने एक दूसरी कम्पनी  Interbrand को इस बात के लिए hire किया ताकि इस तकनीक को एक बेहतर नाम देकर इसका कमर्शियल उपयोग किया जा सके | मजेदार बात ये भी है कि Wi-Fi Alliance ने बाद में यह बयान दिया कि Interbrand ने मजाक के तौर पर Hi-Fi शब्द से प्रेरित होकर Wifi शब्द का इस्तेमाल किया है और बाद में इसी नाम से यह तकनीक प्रचलित हो गयी | आपको बता दें कि इसी कम्पनी ने वाईफाई का लोगो भी तैयार किया |

आम लोगो के लिए पहली बार Wi-Fi का व्यापारिक तौर पर इस्तेमाल जैसा कि हमने पहले बताया 1997 में शुरू हुआ और इसके पहले वर्शन को 802.11 protocol कहा जाता है | जिसकी स्पीड 2 Mbit/s link speeds थी | अपने शुरूआती चरण के बाद wifi के वर्शन में समय के साथ और विकास हुआ और इसका दूसरा वर्शन 802.11b जिसकी स्पीड 11 Mbit/s थी और इसी वजह से समय के साथ वाई-फाई और प्रचलित होता चला गया |  साल 1999 में एक संस्था जो गैर लाभकारी संस्था  Wi-Fi Alliance ने एक trade associasion का गठन किया ताकि Wi-Fi trademark को रजिस्टर्ड किया जाये और इसका नियमिकरण किया जाये | यह एक गैर लाभकारी संस्था है जो आज भी Wi-Fi technology को प्रमोट करती है और साथ ही बाजार में जितने भी Wi-Fi technology पर चने वाले प्रोडक्ट है उन्हें सर्टिफिकेट भी देती है |
आपको अब तक ये तो पता ही है कि कि वाईफाई तकनीक जो है वो ईलेक्ट्रोमाग्नटिक तरंगो के जरिये काम करती है और यह दो frequencies पर चलती है जो है 2.4Ghz ( जिसे 802.11b standered के नाम से भी हम जानते है ) और दूसरी है 5Ghz ( जिसे 802.11a standered के नाम से भी हम जानते है) | कई सालों तक 2.4Ghz वाला जो बैंड है यही WiFi users के लिए पसंद का बैण्ड रहा है क्योंकि यह 11a वाले बैंड से सस्ता पड़ता था लेकिन आने वाले सालों में यह स्थिति बदल गयी और चूँकि साल 2003 तक आते आते 802.11g standard तक आ गया था जिसमे अधिक रेंज के अलावा स्पीड में भी सुधार हो गया और धीरे धीरे लोग वायर वाले कनेक्शन से अधिक इसे प्राथमिकता देने लगे और इसके बाद तो 2009 एक और वर्शन wifi का आया जिसे 802.11n कहा गया जो अपनी पुरानी तकनीक से कंही अधिक बेहतर और तेज था जिसकी वजह से Wi-Fi की लोकप्रियता में तेजी से उछाल आ गया और इसी वजह से एक नई समस्या सामने आई जो Overcrowded की समस्या थी यानि के जब 2.4 Ghz  पर काम करने वाले उपकरणों की संख्या में इजाफा होने लगा क्योंकि लगभग हर जगह और हर आदमी के पास किसी ना किसी तरह की wifi devices थी जो इसी फ्रीकवेंसी पर काम करती थी तो एक दूसरे उपकरण आपस में एक दूसरे को बाधित करने लगे जिसकी वजह से उपकरणों की कार्यकुशलता पर इसका असर होने लगा |
इस समस्या से निदान पाने के लिए Dual-Band Routers का इस्तेमाल होने लगा जिसमे 2.4 Ghz और 5 Ghz दोनों तरह के frequency पर काम करने लायक रेडियोज लगे होते थे जो एक साथ काम कर सकते थे जिनमे सामान्य तौर पर 5Ghz वाली frequency के जरिये उपकरण काम करते थे लेकिन आवश्यक होने पर 2.4 Ghz वाली frequency का भी इस्तेमाल किया जा सकता है | आज भी router लेते समय ये बाते ध्यान में रखी जानी चाहिए |
अब अगर हम आज के समय में Wifi की भूमिका की बात करें तो आज करीबन हर जगह Wifi कनेक्टिविटी की सुविधा है और बहुत से रेलवे स्टेशन और पब्लिक जगहों पर आपको हॉटस्पॉट की सुविधा मिल जाती है और इस क्षेत्र में लगातार विस्तार ही हो रहा है | वजह है इसका इस्तेमाल में आसान और तेज होना | आप घर में भी आसानी से एक हॉटस्पॉट बनाकर घर की सारी devices को आपस में जोड़ सकते है | देखा जाए जो ना केवल इन्टरनेट कनेक्टिविटी को इस तकनीक ने आसान कर दिया है बल्कि बाजार में wifi के जरिये काम करने वाली devices की भरमार है जो आपकी दैनिक जिन्दगी को बेहद आसान कर देती है | घर में लगने वाले सेर्विल्लांस कैमरा के अलावा मनोरंजन के लिए आप अपने टीवी से लेकर स्पीकर्स तक को wifi से जोड़कर पूरे घर को smart house बना सकते है और जितना क्रन्तिकारी परिवर्तन हमारी जिन्दगी में इन्टरनेट ने किया है उतना ही Wifi ने भी हमारे जीने के ढंग को बेहद अलग अंदाज में प्रभावित किया है |
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